almora

बुबुक-संग-आँख-मिचौली-आ-गै-रे-होली

My first stab at poetry गॉव बटी बुबूक आयो फोन, बोले नाती “दिस होली आर यू नॉट कमिंग होम” ? आज छू एकादसी, सबुल डाल हालि रंग, साँझ बटी होली गून दगडवा क संग | मैं बोला घर का टिकेट है बहुत ज़्यादा, ऑफिस का काम भी हुआ है सिर्फ़ आधा, इस बार मैं घर नही आ पाऊँगा, होली मैं बंगलुरु में ही मनाऊँगा | मानो मेरे शब्द उन्हे कहीं चुभ गये , बोलते-बोलते बुबू मेरे रुक गये, फिर एक पल का था सन्नाटा, मेरा भी ध्यान लॅपटॉप ने बाँटा, इससे पहले मैं रखता फोन, बुबू फिर से बोल उठे, और ग़ज़ब थी उनकी टोन|